नोएडा को मिला दुनिया का सबसे आधुनिक रक्षक, 50वी मंजिल पर चंद मिनटों में पहुंचेगा पानी, बुझेगी आग।
नोएडा फायर विभाग की टीम को Compressed Air Foam (CAF) system से लैस फाइटिंग व्हीकल मिले है। जिनका आज ट्रायल आज सफल रहा। मौके पर फ़ायर विभाग के डीजी सुजीत पांडेय के साथ नोएडा के चीफ फायर ऑफिसर प्रदीप कुमार मौजूद रहे।

नोएडा में हर साल गर्म होते मौसम, शॉट सर्किट और अन्य वजहों से आग की घटनाएं सामने आती है। सबसे अधिक खतरा हाईराइज इमारतों को होता है। इन इमारतों में रहने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है। अब ऊंची इमारतों में लगने वाली आग पर काबू पाना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है।
नोएडा फायर विभाग ने अत्याधुनिक Compressed Air Foam (CAF) system फायर फाइटिंग व्हीकल का सफल ट्रायल किया है। यह परीक्षण नोएडा की मशहूर हाईराइज इमारत Supernova की 45वीं मंजिल पर किया गया, जहां इस तकनीक की क्षमता को परखा गया। मौके पर फ़ायर विभाग के डीजी सुजीत पांडेय के साथ नोएडा के चीफ फायर ऑफिसर प्रदीप कुमार मौजूद रहे। इन एडवांस उपकरणों की क़ीमत लगभा 150 करोड़ रुपये बतायी जा रही है।
इस नई तकनीक की खास बात यह है कि यह पानी और हवा के मिश्रण से फोम तैयार करती है, जो आग पर तेजी से काबू पा लेता है। जानकारी के मुताबिक, यह सिस्टम करीब 50 मंजिल तक आग बुझाने में सक्षम है, जो हाईराइज फायर फाइटिंग के लिए बड़ा बदलाव माना जा रहा है।अब तक ऊंची इमारतों में आग लगने पर फायर ब्रिगेड को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। कई बार फायर फाइटर्स को जान जोखिम में डालकर बिल्डिंग के अंदर जाना पड़ता था। लेकिन CAF तकनीक के आने से आग बुझाने की प्रक्रिया ज्यादा तेज, सुरक्षित और प्रभावी हो गई है।
फिलहाल भारत में यह आधुनिक तकनीक सीमित स्थानों पर ही उपलब्ध है, लेकिन नोएडा में इसका सफल परीक्षण होने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि इसे जल्द ही बड़े स्तर पर लागू किया जाएगा।
इस पूरे ट्रायल को लेकर फायर विभाग के डीजी सुजीत पांडेय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश फायर और आपात विभाग को टेक्नीजिलक अपग्रेड किया है। इसका नतीजा है कि वर्ल्ड क्लास उपकरण और फायर फाइटिंग व्हीकल विभाग को उपलब्ध हो रहे है। फायर विभाग का रिस्पॉन्स टाइम दिन बहुत अच्छा हो रहा है। जानकारी देते हुए कहा कि इस तकनीक के इस्तेमाल से हाईराइज बिल्डिंग्स की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी और आग जैसी घटनाओं में नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।



